Tuesday, October 13, 2009

अपराध का नया रूप मोबाइल हैकींग

आप ई-मेल हैकिंग और कम्प्यूटर हैकिंग से तो वाकिफ होंगे ही। आजकल हैकिंग और हैकर्स अपने अपराधों की वजह से लगातार चर्चा में बने हुए हैं। इनके बारे में अमूमन ही नए-नए समाचार हमें प्राप्त होते हैं। इन बातों से यह अंदाज़ा लगाया ही जा सकता है कि हैकिंग कितनी आसानी से हमारे बीच अपनी जगह बनाती जा रही है।इसी विकास का नतीजा है कि हैकिंग की यह तकनीक अब हमारे मोबाइल तक भी पहुँच गई है। अब हमारा सबसे विश्वसनीय साथी, हमारा मोबाइल भी इससे अछूता नहीं है।इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि सेलफोन में लगने वाली चिप किस तरह से बनाई जाती है, इसका पता ये हैकर्स आसानी से लगा लेते हैं, इसलिए उसे आसानी से हैक कर लेते हैं।हैक होने वाले मोबाइल ज़्यादातर जीएसएम तकनीक पर काम करने वाले मोबाइल होते हैं। इन्हें हैक करने के लिए सिर्फ कुछ हार्डवेयर चाहिए जो आसानी से फोन से जुड़ जाता है। बस थोड़ी सी इलेक्ट्रॉनिक्स कि जानकारी होने पर हैकर आपके फोन को हैक करके आपके फोन मेमोरी की सारी जानकारी ले सकता है, कई बार तो आपके फोन में स्टोर की हुई जानकारी बदली भी जा सकती है।


इस तरह की हैकिंग के लिए यह ज़रूरी होता है कि हैकर आपके फोन को 3 से 4 मिनट के लिए उपयोग करे, बिना आपके फोन की ज़रूरी जानकारी के यह हैकिंग संभव नहीं। इसलिए अब अपना फोन किसी अजनबी को देने से पहले इस बारे में विचार ज़रूर कर लें।बढ़ते तकनीकी विकास की वजह से हैकर्स ने मोबाइल हैकिंग का एक तरीका और निकाल रखा है। इसके लिए वे उस फोन की तलाश में रहते हैं जिसमें ब्लूटूथ का उपयोग हो रहा हो। इसके लिए हैकर किसी भीड़ वाली जगह में अपने लैपटॉप पर हैकिंग सॉफ्टवेयर को एक्टिवेट करता है। यह सॉफ्टवेयर एक एंटीने के ज़रिए उपयोग में आ रहे नज़दीकी ब्लूटूथ के सिग्नल को पकड़ लेता है।

फिर अपने लैपटॉप के ज़रिए वह आपके मोबाइल पर उपलब्ध सारी जानकारी हासिल कर उसका उपयोग कर सकता है। इससे बचने का सबसे अच्छा उपाय यह है कि अगर आप ब्लूटूथ का उपयोग कर रहे हैं तो थोड़ा संभल जाएँ। अपने ब्लूटूथ को या तो इन्विज़िबल मोड पर रखें या फिर बंद रखें तो बहुत ही अच्‍छा है।

दूसरा तरीका यह है कि अपने फोन पर पासवर्ड का प्रयोग करें ताकि आपके फोन का उपयोग आप के अलावा कोई न कर पाए। इसके साथ ही आप अपने फोन को समय-समय पर अपडेट करते रहें तो यह

कितना सुरक्षित है आपका नेट बैंकींग

अगर आप अपने बैंक से संबंधित सारा काम इंटरनेट के माध्यम से करते हैं, तो यह जानना आपके लिए जरूरी है कि कहीं अनजाने में आप अपने अकाउंट से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी गलत लोगों तक तो नहीं पहुँचा रहे हैं? अगर आप अपने बैंक की वेबसाइट पर अपने अकाउंट के बारे में कोई भी जानकारी बिना सोचे-समझे दे देते हैं तो सावधान हो जाइए।


क्या है खतरा -ट्रॉजनहोर्स नामक प्रोग्राम अब बहुत से हैकर्स के पास मौजूद है, जिसकी मदद से ये लोग आसानी से अकाउंट की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। जब आप बैंक की वेबसाइट पर अपने अकाउंट के माध्यम से कुछ कार्य करते हैं, तो उस वेबसाइट पर आपको अपने अकाउंट के बारे में कुछ जानकारियाँ देनी पड़ती हैं। यह जानकारी आपसे कुछ फील्ड्स (सूचना क्षेत्रों) द्वारा ली जाती है। ट्रॉजनहोर्स प्रोग्राम की से इन फील्ड्स के साथ हैकर्स कुछ ऐसे फील्ड्स जोड देते हैं, जिनसे वे आपके अकाउंट की गुप्त जानकारी प्राप्त कर लेते हैं, जैसे आपके कार्ड का पिन नंबर।


कैसे किया जाता है -इसके लिए मालवेयर सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जाता है, जो वेब ब्राउजर के साथ आसानी से जोड़ा जा सकता है। इस मालवेयर को एचटीएमएल इंजेक्शन के माध्यम से ब्राउजर से जोड़ा जाता है। यह मालवेयर ब्राउजर के साथ इतनी सक्षमता से जुड़ा रहता है कि यह किसी भी बैंक की वेबसाइट पर भी आसानी से कार्य कर सकता है। यहाँ तक कि उस वेबसाइट का लेआउट भी बदल सकता है।इसके, आपके ब्राउजर के साथ जुड़े होने का आपको एहसास भी नहीं होता है और यह अपना कार्य आसानी से करता रहता है। लेकिन अगर आप से कुछ ऐसी जानकारी बैंक की वेबसाइट पर माँगी जा रही है जो पहले कभी नहीं माँगी गई तो आपके ब्राउजर के साथ इस मालवेयर के होने की संभावना हो सकती है।यह लिम्बो नामक मालवेयर आपके कम्प्यूटर पर ज्यादातर दो तरीकों से स्टोर किया जाता है। पहला तो वह पॉप अप मैसेज जो आपको कुछ अतिरिक्त सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने को कहे और दूसरे कुछ ऐसे तरीके जो उपयोगकर्ताओं को पता न चलें। यह मालवेयर सॉफ्टवेयर अब बड़ी मात्रा में उन लोगों के पास उपलब्ध हैं जो इंटरनेट का दुरुपयोग करने में माहिर हैं। इनकी उपलब्धता का एक कारण है इन मालवेयर सॉफ्टवेयर की कम कीमत। जो जानकारी ये हैकर्स लोगों द्वारा एकत्र करते हैं उसे ‘हार्वेस्ट’ कहा जाता है, यानी कि जानकारी जुटाना। इस जानकारी को जब धन पाने के लिए उपयोग किया जाता है तो इस प्रणाली को ‘कैशआउट’ कहा जाता है। इस तरह के धोखेबाजी के कारोबार में लिप्त लोग इन दोनों प्रणालियों में ही माहिर होते हैं। इन दोनों प्रणालियों का प्रयोग ज्यादातर दो तरह के हैकर्स करते हैं पहले वे जो हार्वेस्ट में निपुण होते हैं और दूसरे वे जिनका काम कैशआउट का होता है। दोनों क्षेत्रों में निपुण हैकर्स साथ मिलकर यह कार्य करते हैं।


सुरक्षा -इस तरह की परेशानियों से निपटने के लिए बहुत से बैंक अपने ग्राहकों के लेन-देन संबंधी व्यवहार पर नजर रखते हैं। यह काम ग्राहक के चलते आ रहे लेन-देन व्यवहार को ध्यान में रखकर किया जाता है। इसके लिए बैंक खास तैयार किए गए सॉफ्टवेयर की मदद भी ले रहे हैं। इन सॉफ्टवेयरों की मदद से इस तरह के हैकर्स को ग्राहकों को नुकसान पहुँचाने से रोका जा सकेगा। बैंकों द्वारा बढ़ाई गई सुरक्षा के साथ ही नेट बैंकिंग करने वाले लोगों को भी थोड़ी सावधानी बरतने की जरूरत है। बैंक अकाउंट के बारे में कोई भी गुप्त जानकारी गलत हाथों में न पहुँचे, इसका ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है।

आपके कंप्यूटर की IP और अप कहा बैठे है